आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खगोल विज्ञान के अनुसार जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की घटना होती है। यह केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है।
चंद्र ग्रहण सामान्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं — पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया। आइए जानते हैं इनके बीच का अंतर।
🌑 1. पूर्ण चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया (अंब्रा) में प्रवेश कर जाता है। इस दौरान चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर "ब्लड मून" भी कहा जाता है। यह दृश्य काफी आकर्षक होता है और लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
🌘 2. आंशिक चंद्र ग्रहण
जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है और बाकी हिस्सा सामान्य दिखाई देता है, तब उसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं। इसमें चंद्रमा का कुछ भाग काला या धुंधला नजर आता है, जबकि बाकी हिस्सा चमकता रहता है।
🌒 3. उपच्छाया चंद्र ग्रहण
उपच्छाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी हल्की छाया (पेनुम्ब्रा) से गुजरता है। इस स्थिति में चंद्रमा की चमक थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन आम लोगों के लिए इसे पहचानना मुश्किल होता है क्योंकि इसमें स्पष्ट काला भाग दिखाई नहीं देता।
क्या रखें ध्यान?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है और इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है। हालांकि, परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार कई लोग इस दौरान विशेष सावधानियां भी बरतते हैं।
इस तरह पूर्ण, आंशिक और उपच्छाया चंद्र ग्रहण में मुख्य अंतर पृथ्वी की छाया के प्रकार और चंद्रमा पर उसके प्रभाव को लेकर होता है।
अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़ी ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।