बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी को उम्मीद थी कि 26 मार्च को “समृद्धि यात्रा” समाप्त होने के बाद नीतीश कुमार पद छोड़ सकते हैं, लेकिन जनता दल यूनाइटेड ने इस प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जदयू इस समय को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है। वह चाहती है कि मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के चयन में उसकी भूमिका पूरी तरह सुनिश्चित हो और कोई भी फैसला आपसी सहमति से लिया जाए।
जदयू ने यह भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह अचानक किसी कम चर्चित नेता को मुख्यमंत्री बनाने के प्रयोग के पक्ष में नहीं है। पार्टी का मानना है कि ऐसा फैसला राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार की सियासत में अनिश्चितता बनी हुई है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
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