पूर्णिया का ‘सबौर वन’ मखाना बना किसानों की ताकत, बढ़ी आय और पहचान


संवाद 

पूर्णिया: पूर्णिया का मखाना, खासकर सबौर वन प्रभेद, अब सीमांचल और मिथिलांचल की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनता जा रहा है। इस उन्नत किस्म ने उत्पादन में करीब डेढ़ गुना बढ़ोतरी कर किसानों की आय में बड़ा इजाफा किया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ‘सबौर वन’ मखाना की खासियत इसकी बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन क्षमता है, जिससे कम लागत में ज्यादा पैदावार संभव हो पाई है। यही वजह है कि यह किस्म तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

अब यह मखाना केवल सीमांचल और मिथिलांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार के अन्य जिलों के साथ-साथ देश के करीब 10 राज्यों में भी इसकी खेती फैल चुकी है। इससे किसानों को नए बाजार और बेहतर दाम मिलने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

किसानों का कहना है कि इस उन्नत किस्म ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है और उन्हें खेती के प्रति नया भरोसा मिला है।

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