पॉक्सो कोर्ट की निगरानी में NEET छात्रा मौत कांड: पुलिस, SIT और CBI की जांच में कई सवाल, मेडिकल रिपोर्ट से नए खुलासे


पटना।
पटना के चर्चित NEET छात्रा मौत मामले में अब तक पुलिस, एसआईटी और सीबीआई की जांच कई सवालों के घेरे में है। घटना के दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसियां किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी हैं। फिलहाल इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट की निगरानी में चल रही है, जहां जांच की दिशा और कई अहम बिंदुओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, छात्रा 6 जनवरी को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल स्थित अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पहले स्थानीय पुलिस और एसआईटी ने जांच शुरू की थी, लेकिन बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। इसके बावजूद अब तक कोई निर्णायक साक्ष्य सामने नहीं आ सका है।

अस्पताल पहुंचते ही शॉक की स्थिति में थी छात्रा

जांच के दौरान अस्पताल में छात्रा का इलाज करने वाले डॉक्टरों से भी विस्तृत पूछताछ की गई। डॉक्टरों के अनुसार जब छात्रा अस्पताल लाई गई थी, तब वह शॉक की स्थिति में थी। उसके हाथ-पैर ठंडे थे और हालत बेहद गंभीर थी। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों को संदेह हुआ कि यह मामला ड्रग ओवरडोज का हो सकता है, खासकर ओपिओइड पॉइजनिंग यानी दर्द निवारक दवाओं की अधिक मात्रा के सेवन से हुई प्रतिक्रिया।

मेडिकल जांच में सामने आए अहम तथ्य

मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत डॉक्टरों ने छात्रा का यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट (UPT) कराया, जिससे यह पता लगाया जाता है कि मरीज गर्भवती है या नहीं। साथ ही यूरिन सैंपल को टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए भेजा गया ताकि शरीर में किसी प्रकार के जहर या नशीले पदार्थ की मौजूदगी का पता चल सके।

डॉक्टरों के मुताबिक यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आई। वहीं टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में बेंजोडायजेपिन और ओपिओइड्स की स्क्रीनिंग पॉजिटिव पाई गई। बेंजोडायजेपिन आमतौर पर नींद की दवाओं में उपयोग किया जाता है, जबकि ओपिओइड दर्द निवारक दवाओं में पाया जाता है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि छात्रा के शरीर में इन दवाओं की अधिक मात्रा पहुंची थी।

अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में क्या मिला

इलाज के दौरान छात्रा का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार अल्ट्रासाउंड में किसी तरह की आंतरिक चोट के संकेत नहीं मिले। इसके अलावा एक महिला गायनेकोलॉजिस्ट से भी परामर्श लिया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बाद में डॉक्टरों ने छात्रा के दिमाग का सीटी स्कैन कराया। जांच में पता चला कि उसके पूरे ब्रेन पर दबाव था और हल्का रक्तस्राव भी हुआ था। इसके आधार पर डॉक्टरों ने आगे का इलाज शुरू किया।

डॉक्टरों की टीम कर रही थी इलाज

अस्पताल प्रशासन के अनुसार छात्रा का इलाज डॉक्टरों की एक टीम कर रही थी। इस टीम में मुख्य परामर्शदाता के साथ डॉक्टर राजेश पराजनी, डॉक्टर अभिषेक, डॉक्टर अमन और डॉक्टर अभिनव शामिल थे।

हॉस्टल वार्डन और दो लोग लेकर पहुंचे थे अस्पताल

डॉक्टरों ने पूछताछ में बताया कि जब छात्रा को अस्पताल लाया गया था, तब उसके साथ हॉस्टल की वार्डन और दो लोग मौजूद थे, जो खुद को छात्रा का मामा बता रहे थे। उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि छात्रा करीब छह घंटे से बेहोश थी।

परिजनों के अनुसार छात्रा 5 जनवरी की शाम पटना स्टेशन पहुंची थी और हॉस्टल जाने के बाद से उसने खाना भी नहीं खाया था। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि उन्होंने परिजनों से कई बार पूछा कि क्या उन्हें किसी साजिश या अनहोनी का शक है, लेकिन उस समय परिजनों ने किसी तरह की आशंका व्यक्त नहीं की थी।

अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया था

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि छात्रा को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया था, बल्कि परिजन उसे दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना भी दी थी। पुलिस की मौजूदगी में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छात्रा को दूसरे अस्पताल ले जाया गया।

सीबीआई कई एंगल से कर रही जांच

फिलहाल सीबीआई इस पूरे मामले की कई बिंदुओं पर गहराई से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं। यदि ऐसा हुआ तो घटना पटना में हुई या जहानाबाद में—इस पहलू की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि संबंध सहमति से बने थे या नहीं।

सीबीआई परिवार की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं परिजन किसी तथ्य को छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रहे थे। साथ ही जिस कपड़े पर स्पर्म मिलने की बात सामने आई, वह कपड़ा परिजनों ने पुलिस को बाद में क्यों दिया और पुलिस ने उसे तुरंत जब्त क्यों नहीं किया—यह भी जांच के अहम बिंदुओं में शामिल है।

फिलहाल इस रहस्यमय मामले में कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। पॉक्सो कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच के बावजूद पुलिस, एसआईटी और सीबीआई अब तक किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार अभी भी जारी है।

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