बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के करीब साढ़े तीन लाख सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सभी शिक्षकों के लिए वार्षिक सेवाकालीन प्रशिक्षण (In-service Training) अनिवार्य कर दिया गया है।
इस फैसले के तहत शिक्षकों को हर साल निर्धारित प्रशिक्षण से गुजरना होगा, जिससे उनकी शिक्षण क्षमता, विषय ज्ञान और आधुनिक शिक्षण तकनीकों में सुधार किया जा सके। विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी।
इसके लिए एससीईआरटी (State Council of Educational Research and Training) को प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने का निर्देश दिया गया है। यह मॉड्यूल नए पाठ्यक्रम, डिजिटल शिक्षा और शिक्षण पद्धतियों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से शिक्षकों को लगातार अपडेट रहने का मौका मिलेगा, जिससे छात्रों को भी बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।
हालांकि, कुछ शिक्षक संगठनों ने इसे अतिरिक्त बोझ बताते हुए प्रशिक्षण के स्वरूप और समय को लेकर सुझाव देने की बात कही है।
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