बिहार के डेहरी प्रखंड में महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। जीविका परियोजना से जुड़कर ये महिलाएं ‘पशु सखी’ के रूप में काम कर रही हैं, जिन्हें स्थानीय लोग अब ‘डॉक्टर दीदी’ के नाम से पहचानने लगे हैं।
ये पशु सखी गांव-गांव जाकर पशुओं, खासकर बकरियों के स्वास्थ्य की देखभाल कर रही हैं। वे टीकाकरण, प्राथमिक उपचार और पशुपालन से जुड़ी जरूरी सलाह देकर ग्रामीणों की मदद कर रही हैं।
इस पहल से न केवल पशुओं की सेहत में सुधार हुआ है, बल्कि महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। इससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और परिवार की जिम्मेदारियों में अहम भूमिका निभा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण का भी एक सफल उदाहरण बन रहा है।
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