बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। सम्राट चौधरी को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना गया है। दिलचस्प बात यह है कि वे करीब 8 साल पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन इस दौरान उन्होंने तेजी से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से की, जहां उन्होंने लंबा समय बिताया। इसके बाद वे जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) में भी रहे।
करीब आठ साल पहले भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पार्टी में उनकी सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता के चलते उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं। वे प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक पार्टी के भरोसेमंद नेता बनकर उभरे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभिन्न दलों में काम करने का अनुभव उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ, जिससे वे अलग-अलग वर्गों और नेताओं के साथ तालमेल बिठाने में सफल रहे।
अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर खरा उतरने की होगी।
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