बिहार की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार पर आरोप लगाया जा रहा है कि वे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण को सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल ही में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपना संभावित उत्तराधिकारी बताने के संकेत दिए थे। इसके बाद से इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में किसी खास सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश को राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इन चर्चाओं पर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इससे राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और भविष्य की रणनीति को लेकर कयास जरूर तेज हो गए हैं।
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