बिहार में शिक्षक बहाली को लेकर चौथे चरण (TRE-4) की अधिसूचना जारी नहीं होने से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लंबे समय से इंतजार कर रहे हजारों युवाओं का कहना है कि सरकार की देरी उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
राजद के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद सरकार इस गंभीर विषय पर चुप्पी साधे हुए है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार लोक सेवा आयोग के कैलेंडर के अनुसार TRE-4 की परीक्षा अगस्त 2024 तक हो जानी चाहिए थी। लेकिन TRE-3 में अनियमितताओं और पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होने और पुनः आयोजन से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पहले मार्च 2025 में यह घोषणा की गई थी कि TRE-4 की परीक्षा अगस्त 2025 में होगी और सितंबर में परिणाम आएंगे। बाद में इसे अक्टूबर 2025 तक खिसका दिया गया। साथ ही रिक्तियों की संख्या भी पहले 1.20 लाख से घटाकर 90 हजार और अब लगभग 46 हजार बताई जा रही है, जिससे अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है।
शिक्षक अभ्यर्थियों का आरोप है कि जहां समय के साथ रिक्तियों की संख्या बढ़नी चाहिए, वहीं इसमें लगातार कमी आना आश्चर्यजनक है। देरी के कारण कई उम्मीदवारों की उम्र सीमा समाप्त होने की कगार पर है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
राजधानी पटना में अभ्यर्थियों द्वारा लगातार धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर बीपीएससी के माध्यम से TRE-4 की अधिसूचना जारी करनी चाहिए, ताकि युवाओं को राहत मिल सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक बिहार के युवाओं को शिक्षक बहाली का इंतजार करना पड़ेगा।
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