देश में नकद पैसे जमा करने, निकालने या किसी को भुगतान करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। आज के समय में बैंकिंग सेवाएं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। पहले जहां लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब कई काम घर बैठे डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का दायरा तेजी से बढ़ा है। सरकार भी कैशलेस और डिजिटल इंडिया अभियान के तहत डिजिटल ट्रांजेक्शन को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी वजह से यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
अगर किसी को पैसे ट्रांसफर करने हों, तो आज एनईएफटी (NEFT) और आईएमपीएस (IMPS) जैसी सुविधाओं के जरिए कुछ ही मिनटों में पैसा भेजा जा सकता है। इन डिजिटल माध्यमों ने बैंकिंग को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना दिया है।
हालांकि, डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद चेक की उपयोगिता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आज भी कई लोग और संस्थान बड़े भुगतान या आधिकारिक लेन-देन के लिए चेक का इस्तेमाल करते हैं। चेक को भुगतान का सुरक्षित और भरोसेमंद माध्यम माना जाता है।
चेक जारी करते समय कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। चेक पर भुगतान की राशि केवल अंकों में ही नहीं बल्कि शब्दों में भी लिखी जाती है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या धोखाधड़ी की संभावना कम हो सके। यही वजह है कि बैंकिंग व्यवस्था में चेक की अहमियत आज भी बनी हुई है।
डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में बैंक और उनकी सेवाएं लोगों की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी हैं। आने वाले समय में तकनीक और बैंकिंग सेवाओं के बीच तालमेल और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
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