बिहार की राजनीति में इन दिनों नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। जन सुराज के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद उदय सिंह ने सक्रिय राजनीति से कुछ समय के लिए दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि बहुत जरूरी निजी कार्यों की वजह से फिलहाल उनका ध्यान राजनीति के बजाय अन्य कामों पर रहेगा।
उदय सिंह ने एक अखबार से बातचीत में बताया कि लंबे समय से उनके कई काम लंबित थे, जिनमें शेखपुरा हाउस के पुनर्निर्माण का काम प्रमुख है। उन्होंने कहा कि परिसर में मौजूद कई छोटी-छोटी इमारतों को तोड़ा जाएगा और नई बिल्डिंग बनाई जाएगी। खास बात यह है कि जिस मकान में प्रशांत किशोर रह रहे थे, उसे भी तोड़कर नए सिरे से निर्माण कराया जाएगा।
यही वह शेखपुरा हाउस माना जाता है, जहां से प्रशांत किशोर जन सुराज की रणनीतियां तैयार कर रहे थे। ऐसे में अब कई राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि प्रशांत किशोर का अचानक पटना छोड़कर बिहटा स्थित आश्रम की ओर शिफ्ट होना और दूसरी तरफ उदय सिंह का राजनीति से ब्रेक लेना, क्या ये केवल संयोग है या इसके पीछे कोई और वजह भी है?
हालांकि राजनीतिक जानकार इस मामले को अलग नजरिए से देख रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का मानना है कि प्रशांत किशोर का बिहटा में आश्रम बनवाना एक व्यक्तिगत फैसला है। उन्होंने कहा कि बिहटा में आईआईटी के पास उनका आश्रम बन रहा है और इसे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल इन घटनाओं ने बिहार की राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म जरूर कर दिया है। आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ हो सकती है।
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