सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए आयोग के निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियों के दायरे में आती है और इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन नहीं किया है। अदालत ने माना कि मतदाता सूची की सटीकता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद है तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है।
फैसले के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह संविधान सम्मत करार दिया है। उनके अनुसार यह फैसला उन राजनीतिक दलों के लिए जवाब है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठा रहे थे।
हालांकि इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने फैसले की अलग व्याख्या करते हुए प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल अभी भी कायम रहने की बात कही है।
अब इस फैसले के बाद SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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