बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू और मैथिली की पढ़ाई होगी शुरू, राज्यपाल ने दिए निर्देश

पटना: बिहार के नवसृजित 211 नए डिग्री महाविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र से उर्दू और मैथिली विषयों की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी। इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति Syed Ata Hasnain ने उच्च शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार, एक जुलाई से इन नए डिग्री कॉलेजों में छह प्रमुख विषयों की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र शामिल हैं। इसके साथ ही उर्दू और मैथिली को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे छात्रों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी जानकारी में बताया गया है कि कुलाधिपति ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिया है कि नए डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं। इसके अलावा, इन कॉलेजों में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की गतिविधियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन की भावना विकसित करना है। राज्य सरकार आने वाले समय में विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे सेमेस्टर के एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम) के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना का नया सिलेबस लागू करने की तैयारी कर रही है। यह व्यवस्था National Education Policy 2020 के अनुरूप होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वयंसेवी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास, सामाजिक सहभागिता और नेतृत्व कौशल में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही मैथिली और उर्दू जैसी भाषाओं को उच्च शिक्षा में स्थान मिलने से क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी मजबूती मिलेगी। उच्च शिक्षा, बिहार की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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