👁️ अब तक पढ़ा गया:
बार
पाटलिपुत्र स्टेशन हिंसा के पीछे बड़ी साजिश? रेल आईजी समेत 6 पुलिसकर्मी घायल, 500 अज्ञात पर एफआईआर
0
June 14, 2026
पटना: बिहार पुलिस मद्य निषेध विभाग की सिपाही भर्ती परीक्षा के दिन रविवार को पटना का पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन अचानक हिंसा और अराजकता का केंद्र बन गया। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की जल्दबाजी में जुटे हजारों अभ्यर्थियों के बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने ऐसा माहौल बनाया कि पूरा स्टेशन रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पथराव में रेल आईजी Jitendra Rana समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस अब इस घटना को केवल छात्रों के गुस्से का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश मानकर जांच कर रही है।
प्रशासन के अनुसार स्टेशन पर तनाव की शुरुआत रविवार सुबह नहीं, बल्कि शनिवार रात से ही हो गई थी। देर रात पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग स्टेशन परिसर में भीड़ को उकसाने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने लगातार लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर भीड़ को भड़काने में लगे रहे।
रेल पुलिस के मुताबिक अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पहले से दो विशेष ट्रेनें उपलब्ध कराई गई थीं। इसके बावजूद कुछ उपद्रवी तत्वों ने ट्रेनों की इमरजेंसी चेन पुलिंग कर उन्हें समय पर रवाना नहीं होने दिया। आरोप है कि इसके बाद छात्रों के बीच यह अफवाह फैलाई गई कि ट्रेनें लेट हो चुकी हैं और वे परीक्षा से वंचित हो जाएंगे। इस सूचना से परेशान सैकड़ों अभ्यर्थी रेलवे ट्रैक पर उतर गए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब कई महत्वपूर्ण ट्रेनें, जिनमें राजधानी एक्सप्रेस भी शामिल थी, प्रभावित होने लगीं। हालात को संभालने के लिए रेल आईजी जितेंद्र राणा स्वयं मौके पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत कर ट्रैक खाली करने की अपील की। लेकिन इसी दौरान भीड़ के बीच मौजूद असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए और पुलिस पर अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह बड़े-बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया गया, उससे प्रतीत होता है कि पूरी घटना पहले से योजनाबद्ध थी।
पथराव में रेल आईजी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
पुलिस प्रशासन इस घटना की तुलना वर्ष 2022 के अग्निवीर आंदोलन के दौरान रेलवे संपत्तियों पर हुए हमलों से कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि छात्रों की भावनाओं का फायदा उठाकर कुछ तत्वों ने रेलवे और कानून-व्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश की। इसलिए जांच केवल उपद्रव तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि इसके पीछे संभावित साजिशकर्ताओं की भी तलाश की जा रही है।
रेल पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नामजद और करीब 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं आधा दर्जन छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह टीम स्टेशन परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मीडिया वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के रिकॉर्ड किए गए वीडियो की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले और छात्रों को भड़काकर हिंसा फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिहार की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
