राम मंदिर दान विवाद में रोहिणी आचार्य की एंट्री, बीजेपी से पूछा- करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा?


अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहराता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह के बयानों के बाद अब राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

क्या है पूरा विवाद?

इस महीने की शुरुआत में अखिलेश यादव ने दावा किया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के दान का हिसाब स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी राशि के गायब होने की चर्चा हो रही है और इस मामले पर मंदिर ट्रस्ट तथा राज्य सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

अखिलेश यादव ने कहा था कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए इसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए और जनता को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।

बृज भूषण शरण सिंह के बयान से बढ़ी सियासत

मामला तब और चर्चा में आ गया जब भाजपा के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें दान राशि के कथित दुरुपयोग की जानकारी है। हालांकि उन्होंने किसी भी प्रकार का दस्तावेज या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उनके इस बयान ने विपक्ष को भाजपा और संबंधित संस्थाओं पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया।

रोहिणी आचार्य ने क्या कहा?

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए बीजेपी से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दान राशि को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं तो सरकार और मंदिर प्रबंधन इस पर स्पष्ट स्थिति क्यों नहीं बता रहे हैं।

रोहिणी आचार्य ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और ऐसे में दान राशि को लेकर उठे सवालों का जवाब जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने आरोपों की पारदर्शी जांच और तथ्य सामने लाने की मांग की।

बीजेपी और ट्रस्ट पर बढ़ा दबाव

विपक्षी दल लगातार इस मामले को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्षों को आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं भाजपा समर्थक नेताओं का कहना है कि विपक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

फिलहाल मंदिर ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

आस्था और राजनीति के बीच घिरा मुद्दा

राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में दान राशि को लेकर उठे आरोप और उन पर जारी राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। अब सभी की नजर मंदिर ट्रस्ट और संबंधित अधिकारियों की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

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