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भोजपुर में एनकाउंटर पर उठते सवाल: भरत भूषण तिवारी की मौत से फिर चर्चा में आए पुराने विवादित मुठभेड़
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June 22, 2026
भोजपुर जिले में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद एक बार फिर जिले में पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की जा चुकी है, जबकि मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। मृतक के परिजनों ने घटना को फर्जी मुठभेड़ बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भरत भूषण तिवारी की मौत का मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ-साथ भोजपुरी फिल्म जगत की कई हस्तियां भी पीड़ित परिवार के समर्थन में सामने आई हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने भोजपुर में पहले हुए उन चर्चित एनकाउंटर मामलों की यादें ताजा कर दी हैं, जिन पर वर्षों तक सवाल उठते रहे।
करीब 20 वर्ष पहले गजराजगंज ओपी क्षेत्र के नवादाबेन गांव में हुई एक पुलिस मुठभेड़ में तीन सगे भाइयों—रामजी सिंह, लक्ष्मण सिंह और भरत सिंह—की मौत हुई थी। उस समय ग्रामीणों और परिजनों ने राजनीतिक एवं प्रशासनिक दबाव में फर्जी मुठभेड़ किए जाने का आरोप लगाया था। घटना के विरोध में गांव के लोग सड़क पर उतर आए थे और मामला इतना बढ़ गया था कि तत्कालीन टाउन डीएसपी और गजराजगंज थानाध्यक्ष को पद से हटाना पड़ा था।
इसी तरह शाहपुर क्षेत्र में वर्ष 1993 में सहजौली और महरजा गांव के बीच हुई करिया तिवारी मुठभेड़ भी लंबे समय तक चर्चा में रही थी। पुलिस का दावा था कि करिया तिवारी अपने साथियों के साथ छिपा हुआ था और पुलिस पर फायरिंग कर रहा था। घंटों चली मुठभेड़ के बाद उसकी मौत हो गई थी, जबकि उसके तीन साथी घायल हुए थे। हालांकि उस समय भी स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि जमीन विवाद के कारण विरोधी पक्ष के प्रभाव में कार्रवाई की गई और कुछ ग्रामीण भी पुलिस के साथ मिलकर गोली चला रहे थे। इन आरोपों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस मुठभेड़ों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता जनता के विश्वास के लिए आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में न्यायिक जांच से लोगों को उम्मीद है कि इस मामले की सच्चाई सामने आएगी और वर्षों से उठते रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा।
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