पटना: बिहार राज्य धार्मिक ट्रस्ट परिषद (बीएसआरटीसी) ने राज्य भर में पंजीकृत मंदिरों और मठों की चल एवं अचल संपत्तियों का व्यापक आकलन करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनकी अवैध खरीद-बिक्री और अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाना है।
परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित पंजीकृत मंदिरों और मठों की भूमि, भवन, दान में प्राप्त संपत्तियों तथा अन्य परिसंपत्तियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए संबंधित संस्थानों से दस्तावेज एकत्र किए जाएंगे और आवश्यकतानुसार भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।
अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में धार्मिक ट्रस्टों की संपत्तियों पर अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिक्री अथवा अनियमित हस्तांतरण की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को रोकने और संपत्तियों का पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
परिषद द्वारा तैयार किए जाने वाले डिजिटल और अद्यतन अभिलेखों से न केवल संपत्तियों की निगरानी आसान होगी, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की पहचान और कार्रवाई भी तेजी से की जा सकेगी। इसके अलावा संबंधित मंदिरों और मठों के प्रबंधन को भी अपनी संपत्तियों का नियमित विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
धार्मिक ट्रस्ट परिषद का मानना है कि इस प्रक्रिया से राज्य के धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों का संरक्षण होगा और श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई परिसंपत्तियों का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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