पेट्रोल-डीजल खरीद पर सरकार की बड़ी सख्ती, बड़े उपभोक्ताओं पर लगे नए प्रतिबंध

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईंधन की खरीद और बिक्री को लेकर नए प्रतिबंध लागू किए हैं, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। नए आदेश के तहत अब औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ता सीधे पेट्रोल पंपों से पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकता का ईंधन केवल अधिकृत कंज्यूमर पंपों से ही प्राप्त करना होगा। इसके साथ ही किसी एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा। पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया गया है कि डीजल केवल वाहन की टंकी या पीईएसओ (PESO) से स्वीकृत कंटेनरों में ही भरा जाए। खरीदे गए ईंधन की आगे बिक्री भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों को इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार के अनुसार यह फैसला अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं देश के कुछ क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की मांग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। जांच में पाया गया कि कई बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता रिटेल और थोक कीमतों के अंतर का लाभ उठाकर पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद रहे थे, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ रहा था। सरकार को आशंका है कि अनियंत्रित खरीदारी से जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के अवैध डायवर्जन को बढ़ावा मिल सकता है। इसी को रोकने और आम लोगों तक निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। निगरानी और कार्रवाई के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के राजपत्रित अधिकारियों, डीएसपी रैंक या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों तथा तेल कंपनियों के अधिकृत अधिकारियों को तलाशी और जब्ती के विशेष अधिकार दिए गए हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का आम वाहन चालकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कार, बाइक और अन्य निजी वाहन मालिक पहले की तरह पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे। 200 लीटर की सीमा मुख्य रूप से बड़े खरीदारों को ध्यान में रखकर तय की गई है और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं होगा। सरकारी आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल अधिकतम 90 दिनों के लिए लागू की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर ईंधन खरीद पर नियंत्रण, जमाखोरी पर रोक और पेट्रोल पंपों पर आम लोगों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करना है। देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज।
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