35 साल बाद मिला इंसाफ: 103 साल की महिला ने जीती जमीन की कानूनी लड़ाई, कोर्ट ने दिलाया मालिकाना हक

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) से न्याय व्यवस्था का एक अनोखा और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। यहां 103 वर्षीय हबीबन खातून को 35 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी जमीन पर मालिकाना हक मिल गया। उन्होंने 68 वर्ष की उम्र में अदालत का दरवाजा खटखटाया था और अब जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें न्याय मिला है। यह मामला 1 कट्ठा 4 धूर जमीन से जुड़ा है। वर्ष 1993 में हबीबन खातून के बड़े बेटे रहमतुल्लाह ने गांव के अफाक अहमद से अपनी मां के नाम पर यह जमीन खरीदी थी। लेकिन रजिस्ट्री के दो दिन बाद ही हबीबन के चचेरे भाई लियाकत हुसैन ने भी उसी जमीन की खरीद का दावा करते हुए उस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद हबीबन खातून ने मार्च 1994 में मोतिहारी सदर मुंसिफ अदालत में मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया। वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन लियाकत हुसैन ने 2004 में जिला जज की अदालत में इस फैसले को चुनौती दी। जिला जज की अदालत से भी फैसला हबीबन खातून के पक्ष में आने के बाद मामला 2014 में पटना हाई कोर्ट पहुंचा। वहां भी हाई कोर्ट ने हबीबन खातून के पक्ष में फैसला सुनाया और उनके मालिकाना हक को बरकरार रखा। हालांकि अदालत से फैसला मिलने के बाद भी उन्हें जमीन का वास्तविक कब्जा पाने के लिए फिर से सदर मुंसिफ अदालत का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों के लगातार तबादले और कोविड-19 महामारी के कारण सुनवाई में लंबी देरी हुई, जिससे उन्हें वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। आखिरकार 35 साल की कानूनी लड़ाई के बाद हबीबन खातून को अपनी जमीन का अधिकार मिल गया। अदालत के फैसले से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। हालांकि हबीबन खातून ने दुख जताया कि उनके पति नईमुल्लाह अंसारी इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए अब इस दुनिया में नहीं हैं। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि न्याय मिलने में भले ही वर्षों लग जाएं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के जरिए अधिकार की लड़ाई अंततः सफल हो सकती है। रिपोर्ट: रोहित कुमार सोनू मिथिला हिंदी न्यूज
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