पटना | मिथिला हिन्दी न्यूज
बिहार की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहे संवैधानिक संकट के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया। भाजपा के विधान पार्षद (MLC) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो गया है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को देवेश कुमार अचानक बिहार विधान परिषद पहुंचे और सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राजनीतिक गलियारों में पहले से ही इसकी चर्चा थी कि भाजपा मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी कर रही है। देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद इस रणनीति पर लगभग मुहर लग गई है।
दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। वे मंत्री तो बन गए थे, लेकिन अभी तक विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। भारतीय संविधान के अनुसार, मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल उठे थे, जिसके बाद सरकार पर संवैधानिक समयसीमा का दबाव बढ़ गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल एक सीट खाली करना नहीं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दल और सरकार की स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। अब रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव के जरिए दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है, जिससे उनका मंत्री पद सुरक्षित रहेगा।
उधर, नवंबर 2026 में बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है। ऐसे में आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति और विधान परिषद चुनावों पर सभी दलों की नजर रहेगी।
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