बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील का बदलेगा सिस्टम, फेस स्कैन से होगी बच्चों की गिनती; 1.09 करोड़ बच्चों का रिकॉर्ड होगा डिजिटल

बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे-मील यानी पोषाहार की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब बच्चों की संख्या और उन्हें दिए जाने वाले भोजन का हिसाब केवल रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए ई-शिक्षाकोष एप का नया वर्जन 3.6.0 लॉन्च किया है। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पोषाहार में होने वाले फर्जीवाड़े, राशन की अनियमितता और गलत संख्या दर्ज करने जैसी शिकायतों पर रोक लगाना है। राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 1.09 करोड़ बच्चों को पोषाहार दिया जाता है। अब इन बच्चों की उपस्थिति, भोजन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या और भोजन से जुड़ी अन्य जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी। स्कूल खुलने के बाद प्रधानाध्यापक को हर दिन सुबह 11 बजे तक जरूरी जानकारी एप पर अपलोड करनी होगी। नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की वास्तविक संख्या दर्ज करने को लेकर किया गया है। इसके लिए ई-शिक्षाकोष एप में फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा जोड़ी गई है। स्कूल में मौजूद बच्चों की संख्या का वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा और इसी के आधार पर उपस्थिति से जुड़ा डेटा तैयार किया जाएगा। यानी अब केवल रजिस्टर में अधिक संख्या लिखकर पोषाहार का हिसाब बढ़ाना आसान नहीं होगा। बच्चों की वास्तविक उपस्थिति के आधार पर ही पोषाहार के लिए राशन की जरूरत तय की जाएगी। इससे फर्जी तरीके से अधिक बच्चों की संख्या दिखाकर अतिरिक्त राशन या राशि लेने की संभावना कम होगी। विभाग का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए स्कूलों में पोषाहार वितरण की निगरानी पहले से अधिक पारदर्शी हो सकेगी। दरअसल, कुछ स्कूलों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक संख्या रजिस्टर में दर्ज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्कूल में 50 बच्चे मौजूद हैं, तो रिकॉर्ड में 100 बच्चों की संख्या दिखाकर भोजन और राशन का हिसाब तैयार करने की गुंजाइश रहती थी। नई डिजिटल व्यवस्था में वास्तविक उपस्थिति का डेटा एप पर दर्ज होने के कारण ऐसी गड़बड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। प्रधानाध्यापकों के लिए डेटा अपलोड करने की समय सीमा भी तय की गई है। प्रत्येक कार्यदिवस में सुबह 11 बजे तक छात्रों की उपस्थिति, भोजन करने वाले बच्चों की संख्या और पोषाहार से संबंधित आवश्यक जानकारी एप पर अपलोड करनी होगी। निर्धारित समय तक डेटा अपलोड नहीं करने पर संबंधित प्रधानाध्यापक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। ई-शिक्षाकोष के नए वर्जन में वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए स्कूलों में पोषाहार वितरण की निगरानी भी की जाएगी। इससे विभाग के पास स्कूल स्तर पर बच्चों की उपस्थिति और भोजन से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर विभाग इस डेटा के आधार पर स्कूलों में पोषाहार व्यवस्था की जांच भी कर सकेगा। शिक्षा विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य मिड डे-मील की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। बच्चों की संख्या से लेकर भोजन की उपलब्धता और गुणवत्ता तक की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होने से निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही सरकारी राशन की खपत का हिसाब भी वास्तविक छात्रों की संख्या के आधार पर तैयार किया जा सकेगा। कुल मिलाकर बिहार सरकार अब सरकारी स्कूलों के मिड डे-मील सिस्टम को रजिस्टर आधारित व्यवस्था से निकालकर डिजिटल निगरानी के दायरे में ला रही है। फेस स्कैन, वीडियो रिकॉर्डिंग और रोजाना ऑनलाइन डेटा अपलोड होने से पोषाहार में फर्जीवाड़े और राशन की अनियमितता पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।
👁️ अब तक पढ़ा गया: बार

إرسال تعليق

0 تعليقات
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.