11 साल बाद बना दुर्लभ संयोग! आद से शुरू हो रहे सावन के चारों सोमवार की तारीखें दोहराईं, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व

मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू

पटना/सीतामढ़ी: भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है और 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को है। शिव भक्त इन चारों सोमवार को व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

इस बार का सावन कई मायनों में खास माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कैलेंडर की दृष्टि से भी एक रोचक संयोग बना है। करीब 11 साल बाद वर्ष 2015 की तरह ही वर्ष 2026 में भी सावन के चारों सोमवार बिल्कुल उन्हीं तारीखों—3, 10, 17 और 24 अगस्त—को पड़ रहे हैं। यही कारण है कि इस संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

सावन 2026 के चार सोमवार

  • पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
  • दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
  • तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
  • चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

क्यों दोहराई गईं वही तारीखें?

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य वर्ष 365 दिनों का होता है, इसलिए हर वर्ष किसी तारीख का वार एक दिन आगे बढ़ जाता है। वहीं लीप ईयर (366 दिन) में वार दो दिन आगे खिसक जाता है। इसी वजह से ग्रेगोरियन कैलेंडर में कुछ वर्षों बाद तारीख और वार का क्रम दोबारा मिल सकता है। कई मामलों में यह पैटर्न 6, 11, 17 या 28 वर्ष के अंतराल पर दोहराया जाता है। वर्ष 2015 और 2026 में सावन के सोमवारों की तारीखों का एक जैसा होना इसी कैलेंडर चक्र का परिणाम है।

पहले सोमवार पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के पहले सोमवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मिट्टी, घी, बर्फ, पत्थर या चने की दाल से शिवलिंग बनाकर पूजा की जा सकती है।

शिवलिंग का दूध, दही, घी, गंगाजल, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराएं और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, सफेद फूल और मौसमी फल अर्पित करें। मान्यता है कि यदि बेलपत्र पर "ॐ नमः शिवाय" या "राम" लिखकर श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाए तो भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा जीवन में सफलता की प्रार्थना करें।

क्या है धार्मिक मान्यता?

शास्त्रों के अनुसार सावन सोमवार का व्रत और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से कठिनाइयों का निवारण होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

हालांकि, शनि की साढ़ेसाती, ढैया या अन्य ज्योतिषीय प्रभावों से निश्चित राहत मिलने जैसे दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ये मान्यताएं धार्मिक विश्वास पर आधारित हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की भक्ति, संयम, सेवा और श्रद्धा का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक कर "हर हर महादेव" के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं।

हर हर महादेव!

— रोहित कुमार सोनू
संपादक, मिथिला हिन्दी न्यूज

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