देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी ने आम लोगों के साथ सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में चीनी की कीमत करीब 20 प्रतिशत बढ़ चुकी है और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। लगातार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें चीनी के भंडारण की सीमा तय करना और करीब 10 साल बाद कच्ची चीनी का आयात करना शामिल है।
भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। ऐसे में घरेलू बाजार में कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालता है। त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका है।
आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में चीनी की औसत मिल-स्तरीय बिक्री कीमत बढ़कर 5,400 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। मार्च में यही कीमत करीब 3,650 रुपये प्रति क्विंटल थी। वहीं शुक्रवार को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 58.20 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।
एक महीने पहले की तुलना में खुदरा कीमत करीब 20 प्रतिशत अधिक है, जबकि एक साल के मुकाबले इसमें लगभग 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कई राज्यों और प्रमुख बाजारों में कीमत राष्ट्रीय औसत से भी ऊपर पहुंच गई है।
पंजाब में चीनी करीब 65 रुपये किलो तक बिक रही है। वहीं मुंबई, भोपाल और अन्य बाजारों में इसकी कीमत करीब 58 से 63 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच बताई जा रही है। पश्चिम बंगाल में भी चीनी की कीमत बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
सरकार की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों पर सबकी नजर रहेगी। खासकर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर यदि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो आम परिवारों के घरेलू बजट पर इसका असर और बढ़ सकता है।
मिथिला हिन्दी न्यूज
संपादक: रोहित कुमार सोनू