मधुबनी में बन रही दुनिया की सबसे लंबी मिथिला पेंटिंग, 200 कलाकार उकेर रहे रामचरितमानस के 51 प्रसंग

मधुबनी के सौराठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में मिथिला पेंटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने की अनूठी पहल शुरू हुई है। यहां करीब 200 कलाकार और छात्र-छात्राएं मिलकर रामचरितमानस पर आधारित विशाल मिथिला पेंटिंग तैयार कर रहे हैं। दावा है कि यह दुनिया की सबसे लंबी मिथिला पेंटिंग हो सकती है। जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा के निर्देश पर तैयार की जा रही इस पेंटिंग में माता सीता और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े 51 प्रमुख प्रसंगों को मिथिला की पारंपरिक चित्रकला शैली में कैनवास पर उकेरा जा रहा है। इसमें श्रीराम का बाल्यकाल, धनुष यज्ञ, सीता-राम स्वयंवर, वनवास, केवट प्रसंग, जामवंत-हनुमंत संवाद और लंका दहन सहित रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल हैं। मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने बताया कि पेंटिंग बनाने का काम 10 अगस्त से शुरू हुआ है और 15 अगस्त तक चलेगा। इसके लिए इंदौर से विशेष रूप से कैनवास, कूची और रंग मंगाए गए हैं। संस्थान के करीब 200 कलाकार और विद्यार्थी इस सामूहिक कला परियोजना में जुटे हैं। पेंटिंग को अंतिम रूप देने में पद्मश्री सम्मानित मिथिला चित्रकला कलाकार बौआ देवी और दुलारी देवी समेत शिवम पासवान, डॉ. रानी झा, संजय जायसवाल और प्रतीक प्रभाकर मार्गदर्शन दे रहे हैं। 15 अगस्त को इस विशाल पेंटिंग को मिथिला चित्रकला के म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा। इसी दिन वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के अधिकारी पेंटिंग की लंबाई की माप करेंगे। निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने पर विश्व रिकॉर्ड के लिए प्रमाणन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य केवल विशाल पेंटिंग तैयार करना नहीं, बल्कि मिथिला की समृद्ध कला परंपरा और माता सीता-भगवान श्रीराम की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने पेश करना भी है।
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