रक्षा बंधन का इतिहास और महत्व: सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम


रक्षा बंधन भारत के सबसे प्राचीन और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इस पर्व का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में रक्षा सूत्र का विशेष उल्लेख मिलता है।

मान्यता के अनुसार देवताओं और असुरों के युद्ध के दौरान देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसके बाद इंद्र को युद्ध में विजय प्राप्त हुई। तभी से रक्षा सूत्र को शुभ और रक्षक माना जाने लगा।

महाभारत में भी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा रक्षा बंधन से जुड़ी हुई है। जब श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकला तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। बदले में श्रीकृष्ण ने जीवनभर उनकी रक्षा का वचन निभाया।

आज भी रक्षा बंधन का पर्व उसी प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार समाज में भाईचारे और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

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