आरक्षण पर चिराग पासवान को संतोष सुमन का जवाब, बोले- पहले आप इस्तीफा दें, मैं भी तैयार

पटना: आरक्षण के मुद्दे को लेकर एनडीए के भीतर सियासी तकरार बढ़ती जा रही है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के इस्तीफे वाले बयान पर हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा (HAM) नेता संतोष कुमार सुमन ने पलटवार किया है। संतोष सुमन ने चिराग पासवान को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि अगर इस्तीफे की बात हो रही है तो इसकी शुरुआत चिराग पासवान को अपने मंत्री पद से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चिराग इस्तीफा देते हैं तो वह भी उनके साथ इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। संतोष कुमार सुमन ने कहा कि चिराग पासवान की पार्टी बड़ी है और उनके पास ज्यादा संख्या बल भी है। उन्होंने कहा कि चिराग राजनीतिक परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं। ऐसे में अगर मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात हो रही है तो चिराग पासवान को पहले इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि चिराग के इस्तीफा देने पर वह भी उनके साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं। संतोष सुमन ने अपने बयान को लेकर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कहीं भी SC-ST आरक्षण खत्म करने या क्रीमी लेयर के आधार पर आरक्षण समाप्त करने की बात नहीं कही है। उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर और कोटे के अंदर कोटा यानी सब-कोटा दो अलग-अलग विषय हैं। इन दोनों मुद्दों को एक साथ जोड़कर लोगों के बीच भ्रम पैदा करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बात SC-ST वर्ग के भीतर उन जातियों को उचित हिस्सेदारी देने को लेकर है, जो आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से काफी पीछे हैं। संतोष सुमन ने मुसहर, भुइयां, हलखोर, नट और डोम जैसे समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वर्गों के लोगों को आज भी कई जगह भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ता है। संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि वह दलित आरक्षण खत्म करने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी मांग है कि दलित समाज के भीतर जो जातियां अभी भी सबसे अधिक पिछड़ी हुई हैं, उनके लिए आरक्षण में उचित हिस्सा तय किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर डर या भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। चिराग पासवान को नसीहत देते हुए संतोष सुमन ने कहा कि SC-ST समाज से जुड़े मुद्दों पर सामंती सोच के साथ बात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताओं को केवल राजनीतिक मंचों से बयान देने के बजाय गरीबों की बस्तियों और झोपड़ियों में जाकर उनकी वास्तविक स्थिति को देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई वंचित परिवारों तक सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण का लाभ आज भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। इस विवाद में हिंदुस्तानी आवामी मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी चिराग पासवान पर निशाना साध चुके हैं। मांझी ने कहा है कि उनकी पार्टी न तो आरक्षण खत्म करने की बात कर रही है और न ही आरक्षण हटाने की। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान संतोष सुमन की बात को सही तरीके से नहीं समझ रहे हैं। दरअसल, चिराग पासवान ने शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर जीतन राम मांझी और संतोष सुमन को घेरा था। चिराग ने कहा था कि आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा की बात करने वाले दोनों नेताओं को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) दलित आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन के खिलाफ है। चिराग इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए आशंका जता चुके हैं कि इससे भविष्य में आरक्षण को कमजोर करने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, संतोष सुमन और जीतन राम मांझी का कहना है कि SC वर्ग के भीतर जो समुदाय लंबे समय से पिछड़े हुए हैं, उन्हें आरक्षण का उचित लाभ मिलना चाहिए। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने एनडीए के भीतर आरक्षण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
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