मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू
सीतामढ़ी/पटना: आज 3 अगस्त 2026 को सावन माह का पहला सोमवार है। भगवान शिव को समर्पित यह दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं, इसलिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। देशभर के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं। यदि आप भी सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो पूजा शुरू होने से पहले आवश्यक सामग्री तैयार कर लेना बेहतर रहेगा, ताकि पूजा के दौरान किसी भी प्रकार की कमी या व्यवधान न आए।
सावन सोमवार पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
पूजा के लिए निम्न सामग्री पहले से तैयार रखें—
- गंगाजल और शुद्ध जल
- कच्चा दूध
- दही
- शहद
- घी
- शक्कर (इन पांचों से पंचामृत तैयार करें)
- 5 या 51 बेलपत्र
- धतूरा
- आक के फूल
- सफेद पुष्प
- चंदन
- अक्षत (चावल)
- भस्म
- जनेऊ
- मौली (कलावा)
- धूप और अगरबत्ती
- दीपक, रुई की बाती
- देसी घी या तिल का तेल
- कपूर
- नारियल
- पान और सुपारी
- लौंग और इलायची
- मौसमी फल
- मिष्ठान, बताशे या खीर
- प्रसाद के लिए पंचामृत
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव मंत्रों की पुस्तक
सावन सोमवार की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें तथा दोबारा शुद्ध जल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और भस्म अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा, रुद्राष्टक या अन्य शिव स्तोत्र का पाठ करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर प्रसाद सभी में वितरित करें।
व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस महीने में शिव पूजा और सोमवार का व्रत करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत करती हैं। अनेक श्रद्धालु संतान सुख, उत्तम स्वास्थ्य, आर्थिक उन्नति, करियर में सफलता और परिवार की समृद्धि की कामना से भी भगवान शिव की आराधना करते हैं।
हालांकि, पूजा और व्रत से जुड़े फल धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित हैं। श्रद्धा, सदाचार और सेवा-भाव के साथ की गई शिव आराधना को विशेष महत्व दिया गया है।
हर हर महादेव!
— रोहित कुमार सोनू
संपादक, मिथिला हिन्दी न्यूज