मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में कुछ संगीतकार ऐसे होते हैं, जिनकी धुनें सिर्फ कानों तक नहीं पहुंचतीं, बल्कि सीधे दिल में उतर जाती हैं। आदेश श्रीवास्तव भी उन्हीं संगीतकारों में से एक थे। करीब 25 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे आदेश ने बैकग्राउंड स्कोर, फिल्म संगीत और गायकी—तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी धुनों में एक खास तरह की मिठास थी। कभी उनका संगीत बारिश की बूंदों जैसा सुकून देता है तो कभी किसी पुराने दर्द की तरह भीतर तक चुभ जाता है।
'बावरी पिया की' और सोनू निगम का वो भावुक पल
2006 में रवि चोपड़ा की फिल्म 'बाबुल' के संगीत पर काम करते हुए आदेश श्रीवास्तव ने बेहद खूबसूरत गीत 'बावरी पिया की' तैयार किया। इस गीत को आवाज देने के लिए उन्होंने उस दौर के बेहद लोकप्रिय गायक सोनू निगम को बुलाया।
रिकॉर्डिंग के दौरान सोनू निगम गीत में इस कदर डूब गए कि रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद उनकी आंखों में आंसू थे। बताया जाता है कि उन्होंने आदेश से कहा कि यह गीत उनके लिए आदेश की ओर से दिया गया एक तोहफा है। यहां तक कि उन्होंने इस गाने के लिए फीस लेने से भी इनकार कर दिया।
यह घटना बताती है कि अच्छी धुन सिर्फ बनाई नहीं जाती, उसे महसूस भी किया जाता है।
'मोरा पिया मोसे बोलत नाही'—एक गीत जो बेचैन कर देता है
आदेश श्रीवास्तव की अपनी आवाज में गाया गया 'मोरा पिया मोसे बोलत नाही', फिल्म राजनीति (2010) का गीत है। इस गाने में एक अजीब-सी उदासी और बेचैनी महसूस होती है।
अंग्रेजी में जिस एहसास के लिए 'हॉन्टेड' शब्द इस्तेमाल किया जाता है, वैसा ही कुछ इस गीत में महसूस होता है। आवाज, धुन और शब्द मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जो सुनने वाले को देर तक अपने भीतर रोके रखता है।
आदेश श्रीवास्तव के 5 यादगार गीत
1. सावन बरसे तरसे दिल — दहक (1999)
गायक: हरिहरन, साधना सरगम
बारिश के मौसम में यह गीत आज भी अपनी अलग जगह रखता है। हरिहरन और साधना सरगम की आवाजों के साथ आदेश की धुन बेहद खूबसूरत बन पड़ती है।
गीत की वह पंक्ति—'देखो कैसा बेकरार...', सुनते ही माहौल बदल देती है। प्रेम, इंतजार और बारिश—तीनों का खूबसूरत मेल इस गीत को खास बनाता है।
2. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल लिख रहा हूं — शिकारी (2000)
गायक: कुमार शानू
शिकारी जैसी फिल्म की सबसे यादगार उपलब्धियों में इस मुलायम रोमांटिक ग़ज़ल को रखा जा सकता है। कुमार शानू की आवाज और आदेश श्रीवास्तव की धुन इसे बेहद सुरीला बनाती है।
यह उन गानों में से है जिन्हें एक बार सुनने के बाद दोबारा सुनने का मन करता है।
3. लाई वी ना गई — चलते-चलते (2003)
गायक: सुखविंदर सिंह
सुखविंदर सिंह की बुलंद और उतार-चढ़ाव वाली आवाज के साथ आदेश का संगीत पूरी तरह न्याय करता है। कहीं आवाज दिल को चीरती हुई ऊंचे सुर पर पहुंचती है तो कहीं संगीत हल्की फुहार की तरह महसूस होता है।
यह गीत आदेश की संगीत क्षमता और सुखविंदर की गायकी का शानदार मेल है।
4. ये हवाएं जुल्फों में तेरी — बस इतना सा ख्वाब है (2001)
गायक: शान, अलका याग्निक
अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी की फिल्म भले बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन इसका यह गीत आज भी याद किया जाता है।
शान की मुलायम आवाज गीत में एक जादुई एहसास पैदा करती है। प्रेम में डूबे लोगों के लिए यह गीत आज भी एक खूबसूरत सिफारिश हो सकता है।
5. सावन बरसे तरसे दिल के अलावा... एक खास स्पेशल मेंशन
ओ धरती तरसे — बागबान (2003)
गायक: ऋचा शर्मा
ऋचा शर्मा की आवाज में एक अलग तरह की गहराई और मजबूती है। खासकर ऊंचे सुरों पर उनकी गायकी गीत को बेहद प्रभावशाली बना देती है।
ओ धरती तरसे एक भावनात्मक गीत है, जिसे ऋचा शर्मा की दमदार आवाज के साथ-साथ आदेश श्रीवास्तव की खूबसूरत धुन के लिए भी याद किया जा सकता है।
संगीत जो वक्त के साथ पुराना नहीं हुआ
आदेश श्रीवास्तव का संगीत सिर्फ एक दौर तक सीमित नहीं रहा। उनकी धुनों में भारतीय शास्त्रीयता, ग़ज़ल की नज़ाकत, लोक-संगीत की मिठास और आधुनिक फिल्म संगीत का खूबसूरत मेल दिखाई देता है।
उनके कई गीत ऐसे हैं जिन्हें सुनते हुए लगता है कि संगीत का असली काम सिर्फ मनोरंजन करना नहीं, बल्कि भावनाओं को आवाज देना है।
शायद यही वजह है कि आदेश श्रीवास्तव की धुनें आज भी सुनने वालों को रोक लेती हैं—कभी सुकून देने के लिए, कभी यादों में ले जाने के लिए और कभी भीतर तक चुभ जाने के लिए।
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संपादक: रोहित कुमार सोनू