टमाटर किसानों को इन दिनों दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर मंडियों में टमाटर की आवक बढ़ने से कीमतों में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर सूखे जैसी स्थिति ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश की प्रमुख थोक टमाटर मंडियों में शामिल महाराष्ट्र की पिंपलगांव एपीएमसी में अतिरिक्त सप्लाई और कमजोर मांग के कारण टमाटर के भाव महज एक सप्ताह में करीब 65 प्रतिशत तक गिर गए हैं।
मंडी में टमाटर की कीमत टूटकर करीब 111 रुपये प्रति 20 किलो रह गई है। कीमतों में अचानक आई इस गिरावट से किसानों को उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बाद बाजार में पर्याप्त मांग नहीं रहने से उन्हें कम कीमत पर टमाटर बेचने की मजबूरी है।
इस गिरावट का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है। बिहार के बाजारों में टमाटर करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है, जबकि एक सप्ताह पहले इसकी कीमत लगभग 40 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी खुदरा कीमत में भी औसतन 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों में आई इस गिरावट से जहां आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कम कीमत पर फसल बेचने के बावजूद खेती की लागत लगातार बनी हुई है। यदि मंडियों में मांग और कीमतों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो टमाटर उत्पादक किसानों को और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।