मधुबनी। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना मधुबनी शहर के विभिन्न पूजा पंडालों और मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। भक्तों ने विधि-विधान से मां चंद्रघंटा की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। मां चंद्रघंटा को शक्ति, शौर्य और शांति की देवी माना जाता है।
नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति और ब्रह्मांड की रचयिता माना जाता है। मान्यता है कि जब चारों ओर घना अंधकार था और ब्रह्मांड शून्य था, तब मां की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। इसी कारण देवी के इस स्वरूप को सृजन, ऊर्जा और प्रकाश से जोड़कर देखा जाता है।
स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंडित पंकज झा शास्त्री ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। उनके तेज और ऊर्जा से सृष्टि को प्रकाश प्राप्त हुआ। धार्मिक मान्यताओं में मां का वास सूर्य के मंडल में बताया गया है और उन्हें सूर्य के प्रचंड तेज को नियंत्रित करने वाली शक्ति के रूप में माना जाता है।
मां कुष्मांडा के स्वरूप को आधुनिक विज्ञान की अवधारणाओं से भी जोड़ा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ब्रह्मांड की शुरुआत अत्यंत सघन और ऊर्जावान अवस्था से मानी जाती है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक सिद्धांत अलग-अलग आधारों पर हैं, फिर भी मां कुष्मांडा की पूजा में ब्रह्मांड, ऊर्जा, प्रकाश और सृजन का प्रतीकात्मक संबंध देखने को मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र में मां कुष्मांडा का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है। सूर्य को आत्मबल, यश, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और उच्च पद का कारक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मां कुष्मांडा की आराधना करने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और तेज की वृद्धि होती है तथा सूर्य से जुड़े शुभ फल प्राप्त होते हैं।
नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालु मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना करेंगे। शहर के विभिन्न मंदिरों और पूजा पंडालों में भी मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।