जन सुराज के सूत्रधार और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने रविवार को मुजफ्फरपुर में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों से जुड़ा बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बिहार में सभी श्रेणी के शिक्षकों को अगले लोकसभा चुनाव से पहले सातवां वेतनमान दिलाना जन सुराज की गारंटी है। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त रहित शिक्षकों की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान करने के साथ उनके समायोजन की दिशा में भी काम किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में शिक्षक अलग-अलग श्रेणियों में बंटे हुए हैं। कोई वित्त रहित शिक्षक है, कोई नियोजित, कोई विशिष्ट शिक्षक, कोई विद्यालय शिक्षक, प्रधानाचार्य तो कोई अतिथि शिक्षक है। उनका कहना था कि अलग-अलग श्रेणियों में होने के बावजूद सभी शिक्षक शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके वेतन एवं सेवा से जुड़ी समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का मुद्दा भी उठाया। प्रशांत किशोर के अनुसार, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के लिए राज्य स्तर पर एक मानक बनाया जाना चाहिए, ताकि जिला स्तर के अधिकारी अपनी इच्छा के अनुसार शिक्षकों को ऐसे कार्यों में नहीं लगा सकें।
यह पहली बार नहीं है जब प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के सातवें वेतनमान को लेकर सार्वजनिक तौर पर वादा किया है। इससे पहले मुजफ्फरपुर में ही उन्होंने कहा था कि यदि जन सुराज के उम्मीदवार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीतते हैं और वह शिक्षकों को सातवां वेतनमान नहीं दिला पाए, तो वह अगले लोकसभा चुनाव में वोट मांगने नहीं आएंगे।
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में शिक्षकों से जुड़ा सातवां वेतनमान, वित्त रहित शिक्षकों की समस्या और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
प्रशांत किशोर का यह बयान एक राजनीतिक वादा है। इसे लागू करने की वास्तविक स्थिति भविष्य में जन सुराज की राजनीतिक भूमिका, सरकार और संबंधित नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू