इस्लामपुर की बड़ी महारानी: जहां आस्था के साथ दिखती है सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल


नालंदा। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नालंदा जिले के इस्लामपुर बाजार स्थित बड़ी दुर्गा माता का मनोकामना मंदिर, जिसे श्रद्धालु सिद्धपीठ बड़ी महारानी के नाम से भी जानते हैं, इन दिनों आस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश कर रहा है। करीब 200 वर्ष पुराने इस मंदिर से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

मान्यता है कि नवरात्र के दौरान बड़ी महारानी के दरबार में होने वाली पूजा-अर्चना में एक मुस्लिम परिवार की ओर से भेंट की गई सोने की पहली नथिया का विशेष महत्व है। इसके अलावा मुस्लिम परिवार की ओर से यहां गुप्त दान किए जाने की परंपरा भी बताई जाती है। यही परंपरा इस मंदिर को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक भाईचारे का भी प्रतीक बनाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बड़ी महारानी के प्रति दोनों समुदायों के लोगों की आस्था लंबे समय से चली आ रही है। नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और दूर-दराज में रहने वाले भक्त भी माता के दर्शन के लिए इस्लामपुर पहुंचते हैं।

इस मंदिर से जुड़ी आस्था की पहुंच देश की सीमाओं से भी बाहर है। लंदन, अमेरिका और कनाडा सहित विदेशों में बसे कई श्रद्धालु भी हर वर्ष नवरात्र के अवसर पर अपने गांव लौटकर बड़ी महारानी के दरबार में शीश नवाते हैं और माता से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

सिद्धपीठ बड़ी महारानी का यह मंदिर बताता है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रही है।

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