बिहार में सहकारी समितियां यानी पैक्स अब केवल कृषि और खाद-बीज से जुड़ी गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पैक्स अब पेट्रोल पंप के खुदरा आउटलेट के रूप में भी नई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं।
राज्य में अब तक 115 पैक्स ने पेट्रोल पंप के खुदरा आउटलेट के लिए सहमति दी है, जबकि इनमें से 62 पैक्स के रिटेल आउटलेट चालू हो चुके हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता आसान होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
पैक्स के माध्यम से पेट्रोल पंप संचालन का लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कई स्तरों पर मिल सकता है। किसानों और ग्रामीण लोगों को ईंधन के लिए दूर के बाजारों पर निर्भरता कम होगी। वहीं, पेट्रोल पंप के संचालन, परिवहन और अन्य संबंधित गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सहकारिता आधारित इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों और संस्थागत ढांचे का बेहतर इस्तेमाल करते हुए पैक्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है। इससे पैक्स की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस मॉडल का विस्तार व्यवस्थित तरीके से किया जाता है तो आने वाले समय में पैक्स ग्रामीण विकास के बहुआयामी केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। कृषि से जुड़ी सेवाओं के साथ पेट्रोलियम रिटेल जैसी गतिविधियां ग्रामीण इलाकों में कारोबार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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