दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में रौनक है, दुकानों पर भीड़ है और हर तरफ रोशनी की चमक दिखाई दे रही है। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल लोगों के मन में जरूर उठता है कि आखिर 90 के दशक वाली दिवाली अब कहां खो गई? वह मासूमियत, अपनापन, परिवार के साथ बिताए पल और त्योहार का सुकून आज कहीं पीछे छूटता नजर आ रहा है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक भावुक कर देने वाला वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है। इस वीडियो में 90 के दशक की दिवाली की खूबसूरत यादों को दिखाया गया है। मिट्टी के दीये, घर की सजावट, बच्चों की खुशियां, परिवार के साथ मिठाइयां बांटना और मोहल्ले में एक-दूसरे के घर जाकर त्योहार मनाने का अंदाज पुरानी यादों को फिर से ताजा कर रहा है।
उस दौर में दिवाली की खुशी महंगे तोहफों या बड़ी-बड़ी सजावट में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे पलों में छिपी होती थी। बच्चे कई दिनों पहले से पटाखों और फुलझड़ियों का इंतजार करते थे। घरों में मिलकर मिठाइयां बनती थीं और शाम होते ही पूरा मोहल्ला मिट्टी के दीयों की रोशनी से जगमगा उठता था।
आज समय बदल गया है। तकनीक और आधुनिक सजावट ने त्योहारों का अंदाज बदल दिया है, लेकिन 90 के दशक की दिवाली से जुड़ी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो सिर्फ पुरानी तस्वीरों और यादों का संग्रह नहीं, बल्कि उन खूबसूरत पलों की याद दिलाता है, जब दिवाली का असली मतलब परिवार, रिश्ते, प्यार और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटना हुआ करता था।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू संपादक: रोहित कुमार सोनू