बिहार विधान परिषद चुनाव में हार के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के भीतर समीक्षा का दौर जारी है। चुनाव में मिली हार को लेकर हुई बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति नाराजगी के स्वर भी सुनाई दिए थे। खासकर राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की ओर से भाजपा को समर्थन दिए जाने को जदयू के नेताओं ने सहजता से नहीं लिया था।
उस समय जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने परोक्ष रूप से भाजपा पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। उनके बयानों से दोनों सहयोगी दलों के बीच सबकुछ सामान्य नहीं होने के संकेत मिले थे। हालांकि, अब उनके सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं।
उमेश कुशवाहा ने अब भाजपा के साथ जदयू के गठबंधन को फेवीकोल से भी मजबूत बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों का रिश्ता पिछले दो दशकों से चला आ रहा है और यह गठबंधन मजबूत बना हुआ है।
राजनीतिक गलियारों में अब सवाल उठ रहे हैं कि विधान परिषद चुनाव में हार की समीक्षा के दौरान भाजपा के प्रति नाराजगी जताने वाले जदयू नेताओं के रुख में अचानक बदलाव कैसे आया? क्या यह केवल चुनावी परिस्थितियों का असर था या फिर गठबंधन के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की जा रही है?
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जदयू के एक-दो नेताओं की नाराजगी से भाजपा के साथ गठबंधन की मजबूती पर कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। दोनों दल लंबे समय से बिहार की राजनीति में सहयोगी रहे हैं और फिलहाल गठबंधन को लेकर सार्वजनिक तौर पर मजबूती का संदेश दिया जा रहा है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक