मिथिला हिन्दी न्यूज | संपादक: रोहित कुमार सोनू
बिहार की राजनीति में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बने बंशीधर ब्रजवासी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनके किसी राजनीतिक बयान को लेकर नहीं, बल्कि वर्ष 2024 के एक पुराने भावुक वीडियो को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने के बाद उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। इसके साथ ही कई यूजर्स उनकी राजनीतिक भूमिका और फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल, मार्च 2024 में शिक्षकों के आंदोलन के दौरान शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक के आदेश पर बंशीधर ब्रजवासी को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 24 जुलाई 2024 को उन्हें सेवा से बर्खास्त भी कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद वह शिक्षकों के बीच चर्चा में आए और धीरे-धीरे उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होती गई।
नवंबर 2024 में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के उपचुनाव में बंशीधर ब्रजवासी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने एक भावुक वीडियो जारी किया था, जिसमें वह रोते हुए शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करते नजर आए थे। वीडियो में उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा था कि मतदाताओं का एक वोट उनके परिवार का भविष्य तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
अब बीजेपी में शामिल होने के बाद वही पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स उनके पुराने बयानों और वर्तमान राजनीतिक फैसले के बीच तुलना कर रहे हैं। कुछ लोगों का सवाल है कि जिन शिक्षकों के समर्थन और सहानुभूति से उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, उनके बीच भरोसा कायम रखने के बजाय बीजेपी में शामिल होने का फैसला क्यों किया?
सोशल मीडिया पर यादव आर्मी समेत कई यूजर्स ने वीडियो साझा करते हुए उन पर तंज कसा है। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक अवसरवाद से जोड़कर देखा, जबकि अन्य यूजर्स ने मतदाताओं के भरोसे और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आ रही प्रतिक्रियाएं अलग-अलग यूजर्स की राय हैं और इन्हें सभी शिक्षकों या मतदाताओं की सामूहिक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि बंशीधर ब्रजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में तिरहुत स्नातक सीट पर जीत दर्ज कर बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। अब बीजेपी में उनके शामिल होने और पुराने भावुक वीडियो के दोबारा चर्चा में आने से राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का उनकी राजनीतिक छवि और शिक्षक समुदाय के बीच उनके समर्थन पर क्या असर पड़ता है।
मिथिला हिन्दी न्यूज | रोहित कुमार सोनू, संपादक
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