शारदीय नवरात्र 2020 में किस वाहन पर होगा माता का आगमन,कैसे करेगी प्रस्थान,क्या हो सकता है फलदेश?जानते है

पंकज झा शास्त्री

शारदीय नवरात्र 2020 में किस वाहन पर होगा माता का आगमन,कैसे करेगी प्रस्थान,क्या हो सकता है फलदेश?जानते है।यह सभी जानते है कि मां दूर्गा का मुख्य वाहन शेर है,परन्तु अगर शास्त्रों की बात करे तो शास्त्र अनुसार जब आदि शक्ति जगदम्बा पृथ्वी लोक में आती है तब उनका वाहन दिन के अनुसार निर्धारित होता है। ज्योतिष दृष्टि से देखा जाए तो जिस दिन जिस वाहन से माता का आगमन और गमन होता है उस अनुसार पृथ्वी पर होने वाले फलादेश का संकेत मिल जाता है।
इस वार शारदीय नवरात्र की शुरूआत पितृपक्ष की समाप्ति के बाद हो जाती है। मगर इस बार 165 साल बाद अद्भुत योग बना है। पितृ पक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्र शुरू नहीं होंगे, बल्कि एक महीने के बाद नवरात्रों की शुरूआत होगी। आमतौर पर पितृपक्ष के समाप्त होते ही अगले दिन नवरात्र आरंभ हो जाता है। लेकिन इस बार नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे,इस क्रम में 26 अक्टूबर को दशहरा होगा। पितृ पक्ष का समापन और दूर्गा पूजा के सुरुआत के बीच अंतराल अधिकमास का होना है। अधिक मास सूर्य का वर्ष 365 दिन करीब 6 घंटे का होता है जबकि एक चंद्रमा वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच 11 दिन का लगभग अंतर आता है। यह अंतर हर 3 वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त चंद्रमास आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिक मास का नाम दिया गया है।

कलश स्थापन इस बार 17अक्टूबर 2020,शनिवार के दिन से प्रारंभ हो रहा है,शनिवार यानि कि माता का आगमन घोड़ा पर हो रहा है। जो चिंता का संकेत दे रहा है। घोड़ा पर माता का आगमन होने से सत्ता पक्ष में बैचेनी,प्रजा में हाहाकार,आक्रोश,हिंसा,रक्तपात,प्रशासनिक सेवा भी अस्तव्यस्त आदि हो सकती है साथ है युद्ध या युद्ध की स्थिति,धरती के हिस्से में जोड़दार झटका,दुर्घटना एवं अन्य प्राकृतिक ,अप्राकृतिक घटना जिसमें क्षति की संभावना अधिक प्रबल है।

माता दुर्गा का गमन इसवार 26अक्टूबर2020 सोमवार को है यानी मां दुर्गा प्रस्थान भैसा पर होकर करेगी। ऐसे में इस पर हम ज्योतिषीय आकलन करे तो ऐसा संकेत मिलता है कि रोग,सोक का अनुमान निश्चित है। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की निधन,विखरता हुआ रक्त,गलत प्रवृति में बढ़ो्तरी,लोगो में मानसिक बैचेनी अधिक,एक दूसरे पर हावी,अस्थिरता का माहौल आदि होने की संभावना भी अत्यधिक प्रबलता में हो सकती है।

हम यह भी कह सकते है कि वेशक आधुनिक विज्ञान उपरोक्त फलादेश को माने या न माने। परंतु योग्य ज्योतिष हर होनेवाली घटनाओं का संकेत पहले ही कर देता है। हर ज्योतिषीय आकलन का संकेत निश्चित देखा जा सकता है। वैसे हर घटना परिवर्तनशील है।🌹

कलश स्थापना मुहुर्त
17/10/2020,शनिवार को
प्रातः 07:46 से दिन के 01:26 तक।

प्रति पदा तिथि इस दिन रात्रि 11:38 बजे तक।

चंद्रमा तुला राशि में अहोरात्र।
वैसे समय अभाव में आप इस दिन घट स्थापना कभी भी कर सकते है कारण यह समय सिद्धि का होता है और दशो दिशा खुला हुआ माना गया है। नवरात्र में राहुकाल भी कमजोर पर जाता है।
नोट - अपने अपने क्षेत्रीय पंचांग अनुसार समय सारणी में कुछ अंतर हो सकता है।🌹

हम आदि शक्ति जगदम्बा से सभी के हित और कल्याण हेतु प्रार्थना करते है।🌹🙏🏽🌹
जय माता दी।

पंकज झा शास्त्री
9576281913

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