पटना। साल 2000 का बिहार विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति में अहम मोड़ साबित हुआ। इस चुनाव ने न सिर्फ सत्ता समीकरण बदले बल्कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के प्रभावी हस्तक्षेप की शुरुआत भी कर दी।
हालांकि वे इस दौरान केवल सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, लेकिन यह कार्यकाल बिहार की राजनीति में नई करवट का संकेत दे गया। चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और सदन त्रिशंकु हो गया। नतीजतन, सरकार बनाने के लिए खूब जोड़-तोड़ और राजनीतिक हलचलें हुईं।
इसी दौरान झारखंड गठन की आहट भी तेज हो गई थी, और इसके इर्द-गिर्द भी राजनीतिक उठापटक चरम पर रही। कुल मिलाकर, 2000 का विधानसभा चुनाव बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और बदलती दिशा का प्रतीक बना।
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