छपरा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति इस बार नए समीकरण गढ़ती दिख रही है। जन सुराज पार्टी ने यहां से पूर्व आईपीएस अधिकारी जय प्रकाश सिंह को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है। उनके नाम की घोषणा होते ही स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है और चर्चा का विषय बन गया है कि इस बार छपरा का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
जय प्रकाश सिंह ने पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद समाजसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। वे लंबे समय से आम लोगों के बीच जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर काम करते रहे हैं। यही कारण है कि जनता में उनकी छवि एक ईमानदार और मजबूत प्रशासक की बनी हुई है।
जन सुराज आंदोलन से जुड़ने के बाद वे लगातार सिस्टम में सुधार, पारदर्शिता और विकास आधारित राजनीति की वकालत कर रहे हैं। छपरा की पुरानी समस्याएं—खराब सड़कें, जलजमाव, रोजगार की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव और युवाओं का पलायन—इन सभी को वे अपना मुख्य चुनावी एजेंडा बना चुके हैं।
चुनावी मैदान में उनकी शैली भी अलग है। बड़े-बड़े प्रचार और दिखावे के बजाय वे डोर-टू-डोर संपर्क, नुक्कड़ सभाओं और चौपाल बैठकों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान की गारंटी देना ही उनका सबसे बड़ा हथियार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छपरा में इस बार पारंपरिक राजनीति को कड़ी चुनौती मिलेगी। जनता खासकर युवा वर्ग और पहली बार वोट देने वाले मतदाता पूर्व आईपीएस जय प्रकाश सिंह को एक मजबूत विकल्प मान रहे हैं।
अगर यह रुझान इसी तरह जारी रहा तो छपरा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है और जय प्रकाश सिंह की भूमिका निर्णायक साबित होगी।
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