नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह स्वरूप तपस्या और साधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से व्यक्ति को शक्ति, ज्ञान, और विवेक की प्राप्ति होती है।
माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल और दिव्य है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, दाहिने हाथ में जपमाला और बाएँ हाथ में कमंडल रखती हैं। इस रूप को देखकर साधक को संयम, साधना और ब्रह्मचर्य का संदेश मिलता है।
उन्हें देवी योगिनी और देवी तपस्विनी भी कहा जाता है। यह रूप विशेषकर साधकों को कठिन तपस्या और साधना के लिए प्रेरित करता है। मां मंगल ग्रह की अधिष्ठात्री हैं और स्वाधिष्ठान चक्र पर नियंत्रण रखती हैं।
ज्योतिष मान्यता के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, उनके लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विशेष फलदायी होती है।
मां ब्रह्मचारिणी की कृपा से भक्तों का जीवन धैर्य, साहस और सफलता से परिपूर्ण हो जाता है।
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