नई दिल्ली। देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना उम्र की मोहताज नहीं होती, इसका जीवंत उदाहरण बने हैं 10 वर्षीय श्रवण सिंह। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के जवानों को लॉजिस्टिकल सपोर्ट देकर उनका हौसला बढ़ाने वाले श्रवण सिंह को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
कैसे बनी सेवा की मिसाल
श्रवण सिंह ने बताया कि जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तब भारतीय सेना के जवान उनके गांव पहुंचे थे। उस समय उनके मन में सैनिकों की सेवा करने का विचार आया।
श्रवण ने कहा—
“मैंने सोचा कि मुझे भी सैनिकों की सेवा करनी चाहिए। मैं रोज़ उनके लिए दूध, चाय, छाछ और बर्फ लेकर जाता था। सैनिकों को इससे काफी राहत मिलती थी।”
पुरस्कार पाकर भावुक हुए श्रवण
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलने पर श्रवण सिंह बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा—
“मुझे अवॉर्ड पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी इसका सपना भी नहीं देखा था।”
देशभर में हो रही सराहना
श्रवण सिंह के इस जज़्बे की देशभर में सराहना हो रही है। इतनी कम उम्र में देशभक्ति और सेवा भावना का यह उदाहरण न केवल बच्चों बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है।
बाल शक्ति का प्रतीक बना श्रवण
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण साहस, सेवा, नेतृत्व या सामाजिक योगदान दिया हो। श्रवण सिंह का नाम इस सूची में शामिल होना पूरे देश के लिए गर्व की बात है।
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