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रोहतास। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया रोहतास जिले का बहुप्रतीक्षित रोपवे प्रोजेक्ट ट्रायल रन के दौरान ही विवादों में घिर गया है। ट्रायल के समय रोपवे के कई पिलर अचानक धराशाई हो गए, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह रोपवे नए वर्ष में पर्यटकों के लिए शुरू किया जाना था, लेकिन इस घटना ने पूरी योजना पर ग्रहण लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार, रोहतास प्रखंड मुख्यालय से प्रसिद्ध चौरासन मंदिर तक रोपवे सुविधा विकसित की गई थी। दावा किया गया था कि इस रोपवे के माध्यम से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी कुछ ही मिनटों में तय की जा सकेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 13 करोड़ रुपये की लागत आई है। स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग को उम्मीद थी कि रोपवे के शुरू होने से धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
लेकिन ट्रायल के दौरान पिलरों के गिरने की घटना सामने आते ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब ट्रायल में ही ढांचा कमजोर साबित हो रहा है, तो आम यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकेगी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर मौजूद तकनीकी टीम ने तत्काल ट्रायल रोक दिया।
सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी खामियों की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए जाने की तैयारी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय व्यवसायियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं, वे फिलहाल टूटती नजर आ रही हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या परियोजना में सुधार कर इसे दोबारा शुरू किया जाएगा या फिर यह महत्वाकांक्षी योजना कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।
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