पटना। बिहार की सियासत में एनडीए के भीतर ही अब खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। सहयोगी दलों के बीच नेताओं की छीनाझपटी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को बड़ा झटका लगा है। एलजेपी (रामविलास) के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़कर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का दामन थाम लिया है।
खास बात यह है कि इन नेताओं को खुद उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। रालोमो में शामिल होने वालों में एलजेपी (रामविलास) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता रहे ए. के. वाजपेयी का नाम भी शामिल है। ए. के. वाजपेयी को चिराग पासवान का करीबी माना जाता रहा है, ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना एलजेपी (रामविलास) के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में एलजेपी (रामविलास) के और भी नेताओं के रालोमो में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इससे एनडीए के अंदर सियासी समीकरण और अधिक उलझ सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम एनडीए में अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को उजागर करता है।
हालांकि, एलजेपी (रामविलास) की ओर से इस मुद्दे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, रालोमो इसे संगठन के विस्तार और मजबूती के तौर पर पेश कर रही है।
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