क्या मिठाई सच में दोषी है? शुगर का मुख्य कारण कुछ और है — जानकर होंगे हैरान


आज के समय में जैसे ही किसी व्यक्ति को शुगर (डायबिटीज़) होती है, सबसे पहले दोष मिठाई और चीनी पर डाला जाता है। आम धारणा बन चुकी है कि मिठाई खाना मतलब शुगर को न्योता देना। लेकिन मेडिकल साइंस और विशेषज्ञों की मानें तो सच्चाई इससे कहीं ज्यादा अलग और चौंकाने वाली है।

मिठाई और शुगर का सीधा संबंध नहीं

डॉक्टरों के अनुसार, सिर्फ मिठाई खाने से किसी व्यक्ति को डायबिटीज़ नहीं होती। मिठाई खाने से ब्लड शुगर अस्थायी रूप से बढ़ती है, लेकिन यह बीमारी तब होती है जब शरीर में इंसुलिन सही तरीके से काम करना बंद कर देता है। यानी समस्या चीनी से ज्यादा शरीर की कार्यप्रणाली से जुड़ी है।

शुगर के असली और बड़े कारण

1. इंसुलिन रेज़िस्टेंस
जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो खून में ग्लूकोज़ जमा होने लगता है। यही टाइप-2 डायबिटीज़ की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है।

2. मोटापा और पेट की चर्बी
विशेषज्ञ बताते हैं कि पेट के आसपास जमा चर्बी इंसुलिन के असर को कमजोर कर देती है, जिससे शुगर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3. गलत जीवनशैली
कम शारीरिक गतिविधि, देर तक बैठकर काम करना और एक्सरसाइज की कमी शुगर को आमंत्रण देती है।

4. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का ज्यादा सेवन
सिर्फ मिठाई ही नहीं, बल्कि मैदा, सफेद चावल, पिज़्ज़ा, बर्गर, सॉफ्ट ड्रिंक और पैकेट बंद फूड भी ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।

5. तनाव और नींद की कमी
लगातार तनाव में रहने और पूरी नींद न लेने से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे शुगर लेवल कंट्रोल से बाहर जा सकता है।

6. आनुवंशिक कारण
अगर परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज़ है, तो आने वाली पीढ़ी में इसका खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।

तो मिठाई की भूमिका क्या है?

मिठाई शुगर की सीधी वजह नहीं, लेकिन अगर इसका सेवन जरूरत से ज्यादा और नियमित रूप से किया जाए तो यह

  • वजन बढ़ाती है
  • इंसुलिन रेज़िस्टेंस को बढ़ावा देती है
  • शुगर के खतरे को तेज़ कर देती है

यानि मिठाई बीमारी की जड़ नहीं, बल्कि सहायक कारण बन सकती है।

शुगर से बचाव कैसे करें?

  • रोज़ कम से कम 30 मिनट टहलना या व्यायाम
  • संतुलित और फाइबर युक्त आहार लेना
  • वजन को नियंत्रित रखना
  • तनाव से दूरी और पूरी नींद लेना
  • समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच

निष्कर्ष

डायबिटीज़ सिर्फ मिठाई खाने की बीमारी नहीं है। यह एक लाइफस्टाइल डिज़ीज़ है, जो गलत खानपान, मोटापा, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और जेनेटिक कारणों से होती है। मिठाई सीमित मात्रा में खाई जाए तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए यह सीधे तौर पर खतरनाक नहीं है।

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