राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वजह है—उनकी पार्टी के भीतर उभरती बगावत, जिसने संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में पार्टी के कई विधायकों के बागी तेवर सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
मधुबनी से रालोमो विधायक माधव आनंद ने खुले तौर पर उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कुशवाहा ने “आत्मघाती कदम” उठाया है। इस बयान के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह साफ तौर पर उजागर हो गई है।
दरअसल, लोकसभा के शीतकालीन सत्र की समाप्ति के बाद बुधवार शाम उपेंद्र कुशवाहा ने पटना स्थित अपने आवास पर एक लिट्टी पार्टी का आयोजन किया था। इस अनौपचारिक मिलन में उन्होंने पार्टी के तीनों विधायकों—माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह—को आमंत्रित किया था। संयोग से तीनों विधायक उस समय पटना में ही मौजूद थे।
लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब पार्टी शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही तीनों विधायक पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
सवाल उठ रहे हैं कि क्या रालोमो में बड़ी टूट की तैयारी है, या फिर यह दबाव की राजनीति का हिस्सा है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विधायकों के इस कदम को पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी खींचतान किस दिशा में जाती है और रालोमो अपनी अंदरूनी कलह से कैसे निपटती है।
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