संवाद
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अंतर्गत मिलने वाली पेंशन देश के करोड़ों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है। लेकिन वर्तमान समय में EPFO पेंशन की न्यूनतम राशि इतनी कम है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशनभोगियों के लिए दैनिक खर्च चलाना बेहद कठिन हो गया है।
इसी वजह से लंबे समय से EPFO पेंशन बढ़ाने की मांग उठती रही है। देशभर में कर्मचारी संगठनों ने कई बार आंदोलन की चेतावनी दी है और सरकार से लगातार यह अपील की जा रही है कि पेंशन की राशि में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए, ताकि बुजुर्ग कर्मचारी अपनी बुनियादी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकें।
पेंशन बढ़ाने की मांग के पीछे मुख्य कारण
अधिकांश कर्मचारी 23–24 वर्ष की उम्र में ही नौकरी में लग जाते हैं और लगभग 35–40 वर्षों तक लगातार सेवा देते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी शारीरिक क्षमता पहले जैसी नहीं रहती, जिससे वे कोई कठिन या अतिरिक्त काम करने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में पेंशन ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा बन जाती है।
आज के समय में दवाइयों, इलाज, किराया, बिजली-पानी और घरेलू आवश्यक वस्तुओं की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन EPFO पेंशन में उसके अनुरूप कोई ठोस वृद्धि नहीं की गई है। यही कारण है कि बहुत से पेंशनभोगी आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर हैं।
सम्मानजनक जीवन के लिए पेंशन में बढ़ोतरी जरूरी
यदि EPFO पेंशन में उचित बढ़ोतरी की जाती है, तो इससे बुजुर्ग कर्मचारियों की आर्थिक निर्भरता कम होगी और वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। साथ ही, यह कदम उन कर्मचारियों के प्रति न्याय होगा जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश और संस्थानों की सेवा में लगाया है।
सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लेगी और EPFO पेंशन में जल्द ही ठोस बढ़ोतरी की घोषणा करेगी।
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