रेल से लेकर तेल तक, खाद्य से लेकर टैक्स तक: एक साथ असर दिखाता बजट 2026

संवाद 

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार का आम बजट 2026 इस बार एक अलग ही तस्वीर पेश करता नजर आ रहा है। यह बजट सिर्फ किसी एक वर्ग या एक सेक्टर तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि रेल से लेकर तेल तक और खाद्य पदार्थों से लेकर टैक्स व्यवस्था तक—हर क्षेत्र पर एक साथ असर डालने वाला माना जा रहा है। यही वजह है कि बजट 2026 को “ऑल-इन-वन बजट” भी कहा जा रहा है।

सबसे पहले बात करें रेलवे की, तो सरकार का फोकस आधुनिकीकरण, नई ट्रेनों और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर रहने की उम्मीद है। रेलवे को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर जोर दिया जा सकता है, जिससे रोजगार और कनेक्टिविटी दोनों को बढ़ावा मिले।

वहीं तेल और ऊर्जा क्षेत्र बजट का दूसरा अहम स्तंभ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन साधना सरकार के लिए चुनौती है। बजट 2026 में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और ग्रीन एनर्जी को लेकर नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।

खाद्य पदार्थों और कृषि से जुड़ी नीतियां भी इस बजट का बड़ा हिस्सा हैं। अनाज, दाल, तेल और रोजमर्रा के खाद्य सामान की कीमतें नियंत्रित रखना सरकार की प्राथमिकता मानी जा रही है। किसानों के लिए योजनाओं, भंडारण और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर देकर सरकार महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश कर सकती है।

इसके साथ ही टैक्स व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी खास चर्चा है। मध्यम वर्ग को राहत देने, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और राजस्व बढ़ाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश इस बजट की पहचान हो सकती है। यानी टैक्स भी और विकास भी—दोनों को साधने का प्रयास।

कुल मिलाकर, बजट 2026 सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि हर सेक्टर को जोड़ने वाला बजट माना जा रहा है। रेल, तेल, खाद्य और टैक्स—चारों स्तंभों पर एक साथ फैसले लेकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि विकास समग्र होगा, न कि किसी एक वर्ग तक सीमित।

अब देखना यह है कि यह “सब एक साथ” वाला बजट आम जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

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