पटना। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नए लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। ग्रामीण विकास विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि पूर्व में किए गए सर्वे के आधार पर लाभुक परिवारों का भौतिक सत्यापन कार्य 31 जनवरी तक हर हाल में पूरा किया जाए। जिलों से आ रही शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इस सत्यापन प्रक्रिया में करीब 40 प्रतिशत आवेदक परिवार अयोग्य घोषित किए जा सकते हैं।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में कुल एक करोड़ चार लाख परिवारों को पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के संभावित लाभुक के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। अब इन्हीं परिवारों के घर-घर जाकर कर्मियों द्वारा सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के दौरान यह जांच की जा रही है कि सर्वे के समय परिवार द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं, साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित परिवार योजना के तय मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
जानकारी में गड़बड़ी पर बाहर हो सकते हैं नाम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में परिवारों द्वारा सर्वे के दौरान दी गई जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रही है। कहीं पक्का मकान पाए जाने, कहीं आय या संपत्ति संबंधी मानकों में गड़बड़ी, तो कहीं पारिवारिक स्थिति गलत पाए जाने के कारण आवेदकों को अयोग्य की श्रेणी में रखा जा रहा है।
60 से 65 लाख लाभुकों की फाइनल सूची की उम्मीद
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, सत्यापन पूरा होने के बाद करीब 60 से 65 लाख परिवारों की अंतिम सूची तैयार होने की संभावना है। शेष परिवार योजना के लाभ से बाहर हो सकते हैं। हालांकि, सत्यापन के बाद भी प्रखंड स्तर और जिला स्तर पर सूची की दोबारा जांच की जाएगी, ताकि किसी योग्य परिवार का नाम गलती से न कट जाए।
पारदर्शिता पर विभाग का जोर
ग्रामीण विकास विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है। गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेने वालों को बाहर किया जाएगा, जबकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद और बेघर परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।
मौसम, योजनाओं और ग्रामीण विकास से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए पढ़ते रहिए मिथिला हिन्दी न्यूज