पटना/सीतामढ़ी। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने पार्टी अनुशासन के उल्लंघन और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर बड़ा एक्शन लिया है। जदयू नेता सह अधिवक्ता विमल शुक्ला को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया है। इस संबंध में जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने औपचारिक पत्र जारी किया है।
जारी पत्र में कहा गया है कि विमल शुक्ला की गतिविधियां पार्टी की नीति, सिद्धांत और अनुशासन के विरुद्ध पाई गईं, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने यह कठोर निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि विमल शुक्ला को कुछ दिन पूर्व लोक अभियोजक (Public Prosecutor) के पद से भी हटा दिया गया था। इसके अलावा, उनके और सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद ठाकुर के बीच लंबे समय से मतभेद की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में रही है। माना जा रहा है कि आंतरिक खींचतान और सार्वजनिक असहमति ने भी पार्टी नेतृत्व को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
जदयू के इस फैसले के बाद सीतामढ़ी की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई पार्टी के भीतर अनुशासन सख्त करने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के संदेश के रूप में देखी जा रही है।
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