77वां गणतंत्र दिवस: लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता का गौरवशाली पर्व


भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे हर्ष, गर्व और देशभक्ति की भावना के साथ मना रहा है। हर वर्ष 26 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में इसलिए स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है क्योंकि इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और देश पूर्ण रूप से एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी समारोह या परेड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिन देश के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी जनता में निहित है, जो विविध भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद एक सूत्र में बंधी हुई है।

संविधान: भारत की आत्मा

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसने हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी दी है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किया गया यह संविधान आज भी हमारे लोकतंत्र की मजबूत नींव बना हुआ है।

राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र का उत्सव

गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभर में तिरंगा फहराया जाता है, परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी प्रगति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।

कर्तव्य और संकल्प

यह दिन केवल अधिकारों को याद करने का नहीं, बल्कि कर्तव्यों का भी स्मरण कराने का दिन है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान की मर्यादा बनाए रखेंगे, देश की एकता-अखंडता को मजबूत करेंगे और लोकतंत्र को और सशक्त बनाएंगे।

77वें गणतंत्र दिवस पर आइए हम सब मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें।

जय हिंद 🇮🇳

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